
कथा के तीसरे दिन कामठी में साध्वी पं. नीलम गायत्री जी ने दिए गूढ़ आध्यात्मिक संदेश
कुई कुकदुर कबीरधाम जिले के पण्डरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम कामठी में आयोजित पाँच दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन दृष्टि और जीवन दर्शन जैसे गहन विषयों पर विशेष चर्चा हुई। इस अवसर पर जगदगुरु श्रीरामभद्राचार्य जी की परम शिष्या, प्रख्यात कथावाचिका साध्वी पं. नीलम गायत्री जी ने श्रोताओं को जीवन के सार तत्व से परिचित कराया।
साध्वी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जब मनुष्य की दृष्टि सही होती है, तभी उसका दृष्टिकोण सही बनता है। सही दृष्टिकोण से जीवन दर्शन शुद्ध होता है और अंततः वही भगवत दर्शन की ओर ले जाता है। उन्होंने इसे मानव जीवन की सर्वोच्च साधना बताया।
कथा के दौरान सीताराम के द्वैत-अद्वैत सिद्धांत पर भी प्रकाश डाला गया। साध्वी जी ने कहा कि माता भगवती सीता और प्रभु श्रीराम भले ही दृष्टिगत रूप से द्वैत प्रतीत होते हों, किंतु तत्वतः वे अद्वैत हैं—अभिन्न और एक-दूसरे के पूरक।
इसके साथ ही उन्होंने संस्कृतियों के समन्वय पर बल देते हुए बताया कि माता सीता कृषि संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि प्रभु श्रीराम ऋषि संस्कृति के प्रतीक हैं। जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब इन दोनों संस्कृतियों का संतुलन स्थापित हो।
उल्लेखनीय है कि यह संगीतमय श्रीराम कथा 29 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 02 फरवरी 2026 तक चलेगी। कथा का आयोजन समस्त ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी, ग्राम कामठी, पण्डरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्म, भक्ति और ज्ञान का लाभ ले रहे हैं।



